मंगलवार, 28 जुलाई 2015

कलाम साहब को नमन

कलाम लिखे-पढ़े, बोले- सुने, जाते हैं ।
और कुछ कलाम दिल में बस जाते है ।

वो एक कलाम करोड़ों के दिल तारा है ।
गर्दिश में बस गया है अब, मगर हमारा है ।

क्या हिंदू ,क्या मुसलमा,क्या सिक्ख- ईसाई ।
आज किसी की रोके रूकती नहीं रुलाई ।
साबित कर दिया है जाते-जाते भी उन्होंने ।
मानवता ही सबसे पहला धर्म है मेरे भाई ।

वो चला गया तो है इस असीम आसमां में ।
छोड़ गया है अपना सब कुछ इस जहाँ में ।
उस के जाने का दिल में मलाल न रखना ।
जो छोड़ा है पीछे बस उसका ख्याल रखना ।

सलाम सलाम सलाम  
आप को मेरा बारम्बार सलाम 
भारत माँ के सच्चे सपूत 
शिक्षक, वैज्ञानिक, देशभक्त मजबूत 
प्यार मुहब्बत और शांति के दूत 
मेरा शत शत नमन,हज़ारो बार सलाम 
देश के मन में बसे रहोगे हर पल 
ए पी जे अब्दुल कलाम ।
---शिवराज शर्मा ---

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